अमेरिका में महंगी गैस से इलेक्ट्रिक वाहनों की खोज 57% बढ़ी, लेकिन चार्जिंग सबसे बड़ी समस्या बनी है

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Auto Industry: गैस के मूल्यों में भारी बढ़ोतरी और जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल, डीजल) के खिलाफ मुहिम के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों में अमेरिकियों की दिलचस्पी बढ़ रही है। पिछले माह इलेक्ट्रिक कारों के लिए गूगल सर्च में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। ऑटोमोबाइल सेक्टर से संबंधित वेबसाइट पर जनवरी से फरवरी के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों की सर्च 43% और फरवरी से मार्च में 57% बढ़ी है। इस स्थिति ने ऑटो निर्माताओं का हौसला बढ़ाया है। फरवरी में नेशनल फुटबॉल लीग के फाइनल मुकाबले सुपर बाउल के दौरान कारों के लगभग सभी विज्ञापन इलेक्ट्रिक वाहनों से संबंधित थे।

फिर भी, गैस से चलने वाले वाहनों के मुकाबले ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री के रास्ते में दो बड़ी बाधाएं हैं- कारों की सप्लाई . और उनकी चार्जिंग का ढांचा। वैसे, गैस की कीमतों में वृद्धि से पहले ही इलेक्ट्रिक वाहनों की सप्लाई कई कारणों से प्रभावित रही है।

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सेमी कंडक्टर चिप की कमी ने पूरी ऑटो इंडस्ट्री के लिए समस्या खड़ी कर रखी है। यूक्रेन युद्ध से उत्पादन में और अड़चन आई है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लंबे समय तक इंतजार सामान्य है। नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी विभाग के पूर्व प्रमुख डेविड फ्रीडमैन कहते हैं, गैस मूल्यों के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों, हाइब्रिड कारों में लोगों की रुचि और बढ़ेगी लेकिन जरूरत के हिसाब से मांग पूरी नहीं हो सकेगी।

इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ने के बाद उनकी चार्जिंग की समस्या सामने आएगी। फिलहाल, इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले बहुत लोगों के पास घर में चार्जिंग की सुविधा है।

लेकिन, यह हर किसी के लिए संभव नहीं है। घनी आबादी वाले शहरों में बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों के पास स्वयं की चार्जिंग सुविधा नहीं है। इसके अलावा लंबी दूरी तक चलने की स्थिति में चार्जिंग स्टेशनों की कमी से दिक्कत होगी।

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अमेरिका में एक लाख सार्वजनिक चार्जर हैं। ये यूरोप और चीन से कम हैं। ऑटो विशेषज्ञों का कहना है, भविष्य में दस गुना अधिक चार्जिंग स्टेशनों की जरूरत पड़ेगी। इंटरनेशनल क्लीन ट्रांसपोर्टेशन काउंसिल के शोधकर्ता डेल हाल का कहना है, अमेरिका को 2030 तक हर साल सार्वजनिक चार्जरों की संख्या औसतन 25 से 30 प्रतिशत बढ़ाना होगी। इस दिशा में कुछ काम तो हो रहा है। कई कंपनियों ने चार्जिंग सुविधा के लिए 22 हजार करोड़ रुपए से अधिक निवेश किया है। राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार ने चार्जिंग स्टेशनों के लिए 56 हजार करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। लेकिन, चार्जिंग के साथ मुख्य समस्या मुनाफे से जुड़ी है।

ऑटो विशेषज्ञ प्रोफेसर स्पलिंग कहते हैं, वाहनों की चार्जिंग से मुनाफा कमाना बहुत मुश्किल है। भविष्य में हर दस वाहन पर एक सार्वजनिक चार्जर जरूरी होगा लेकिन ऐसा कैसे होगा साफ नहीं है।

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